सूर्य  नमस्कार क्या है ? सूर्य नमस्कार के लाभ सूर्य नमस्कार करने की विधि सूर्य नमस्कार चे फायदे सूर्य नमस्कार आसन

सूर्य नमस्कार के लाभ सूर्य नमस्कार करने की विधि सूर्य नमस्कार चे फायदे सूर्य नमस्कार आसन सूर्य नमस्कार स्टेप्स

  • ‘सूर्य नमस्कार का शाब्दिक अर्थ सूर्य को अर्पण  या नमस्कार करन है. यह योग आसन  शरीर  को सही आकर  देने ओर  मन कोप सन्ति व  स्वस्थ  रखने  का उत्तम  तरीका है|
  • सूर्य नमस्कार १२ शक्तिशाली  योग  आसनो  का  एक  समन्वय  है | जो एक  उत्तम  कड़ियों – वेक्युलर  व्यायम भी है.  ओर श्वास्थ  के लिए  लाभदयाक  है |    यदि आपके पास समय की कमी  है, ओर  आप  चुस्त दुरूस्त  रहन  रहने  का  कोई   नुस्खा  खुज  रहे है , तो वह  आप को यहाँ मिल जाएगा |
  • सूर्य नमस्कार प्रात:काल  खली पेट कर न उचित है | आई आपने  अच्छे  स्वास्थ  के लिए  सूर्य  नमस्कार  के  इन सरल  ओर प्रभावि आसनो  को आरंभ करे |

 

  • सूर्य नमस्कार के चरण में १२  आसन  के दो  क्रम  होते है|१२ योग  आसन  सूर्य नमस्कार  का एक क्रम  पुण    करते है | सूर्य नमस्कार  के एक चरण  के  दूसरे   क्रम  में योग आसनो  का  वो ही क्रम  दोहराना  होता है , परन्तु  केवल  दाहिने  पैर  के स्थान  पर  बहिने  पैर का  प्रयोग  कर न होगा |

 

  • सूर्य नमस्कार के विभिन्न प्रारूप पाए जाते है, हलाकि  बेहतर  यही है की  किशी  एक  ही  प्रारूप  का अनुसरण  करे  ओर  उही के नियम अनुसार  करे ओर उसके नियमोक अभ्याश  से  उत्तम परिणाम पाए | अच्छे  स्वाश्थ्य के अतिरिक्त सूर्य नमस्कार  धरती  पर जीवन  के  सरक्षण  के  लिए  हमें सूर्य  के प्रति  आभार  प्रकट करने  का  अवश्य  भी गेट है | अगले  १० दिनों  के लिए  अपना  दिन,  मन  में सूर्य  की ऊर्जा  के प्रति  आभार  ओर  कृपा  का भाव  रखकर पारंभ करे |

 

  • १२ सूर्य नमस्कार  ओर  दूसरे  योग  आसन  को  करने  प्रश्चात  योग निंद्रा मर पूर्ण विश्राम अवशय करे|  आप  पाएगे  की यहाँ  आप चुस्त दुरुस्त  प्रसन्न  ओर शांत  रहने  का नियम बन गया है ; एक नियम  जिसका प्रभाव दिनभर रहता है  | सूर्य नमस्कार  एक  पूर्ण  योगिक व्यायाम
  • सूर्य नमस्कार के १२ आसन :

सूर्य नमस्कार के लाभ (Benefits of Sun Salutation)

.प्राणाम आसन |

. हस्तपाद आसन |

.हस्तपाद  आसन |

.अश्व  संचालन  आसन  |

. दंडशन  |

.भुजंग  आसन |

. पर्वत आसन |

९.अश्वसंचालन आसन |

१०. हस्तपाद आसन |

११. हस्तउत्थान आसन |

१२. ताड़ासन  |

  • सूर्य नमस्कार करने की विधि:

सूर्य नमस्कार के लाभ (Benefits of Sun Salutation)

. प्राणम  आसन : अपने  आसन  के किनारे   पर खड़े  हो  जाए , अपने  दोनों  पंजे  एक साथ जोड़  कर रखे  ओर  पूरा वजन  दोनों पैर पर समन रूप से डाले | अपनी छाती फुलाए  ओर  कंधे ढीले रखे | श्वाश  लेते  हुए दोनों  हाथ  बगल  से ऊपर  उठाए  ओर   श्वाश  छोड़ते  हुए  हथेलिया  को  जोड़ते  हुए  छाती  के  सामने प्रणाम  मुद्रा  में  ले  आए  |

.हस्तपग आसन : श्वाश  लेते  हुए  हाथो  को ऊपर  उठाए  ओर  पीछे  ले जाए  व  बाजुओ  की द्विरिर  पेशियो  को कानो  के  समीप रखे  | इस आसन  में पूरा  सरीर को  जेडीयू से लेखर  हाथो की उंगलिओ तक  सभी  अंगो  को ऊपर  की तरफ  खीचने  का प्रयाश करे |

.हस्तपग आसन : श्वाश  छोड़ते  हुए  व  रीड  की हड्डी  सीधी  रखते  हुए कमर   से आगे जुके  | पूरी  तरह  श्वाश  छोड़ते  हुए  दोनों  हाथो के पंजो  के समीप   जमींन  पर रखे |

.दंडासन :शवश लेते हुए बाए  पैर को पीछे  ले जाए  ओर संपूर्ण  सरीर  को सीधा  रेखा  में रखे |

. अष्टांग  नमस्कार : आराम  से  दोनों धुटने जमींन पर  लाए  ओर  श्वाश छोडे |  अपने कूल्हों  को  पीछे ऊपर  की और उठाए | पुरे  सरीर  को  आगे  को और  खिसकाए | अपनी छाती  और  ढिचन  को  जमींन  से छुटे | अपने कुल्ह को थोड़ा  उठा  कर ही रखे |अब दो हाथ ,दो पैर ,दो  धुटने ,छाती  और  जमींन  को छुट्टे   होए  होंगे |

.भुजंग आसन :  आगे  की ओ  सरकते हुए , भुजंगसन  में छाती  को  उठाके  कुहनियां  मुड़े  रहे सकते है |  कंधे  कानो  से  दूर  और  आखो  को  और  रखे |

. पर्वत आसन : श्वाश छोड़ते हुवे कूल्हों  और  रीड  की हड़िया  के निचले  भगा  को ऊपर , छाती  को  निचे  जुकाकर  एक उल्टा वि  के आकर में  आ  जाए |

.अश्वसंचालन  आसन : श्वाश लेते होए   दाहिने  पैर  दोनों  हाथो के बिच इ आए,बाए  धुटने  को जमींन  पर रख सकते है | और अपनी आँखे ऊपर की उर रखे |

१०.हस्तपग आसन:  श्वाश छोड़ते  हुए  बाए  पैर को  आगे लाए , हथेलिया  को जमींन  पर ही रहने दे  | अगर  जरुरी  हो  तो धुटने  मोड़ सकते है|

११.हस्तउत्थान आसन :  श्वाश लेते  हुए  रीड  की हड्डी  को  धीरे धीरे ऊपर  लाई ,हाथो को ऊपर और पीछे की उर ले जाए,कूल्हों  को आगे  की  तरफ धकेले |

१२.ताड़ासन :  श्वाश  छोडते  हुए  पहले  शरीर  शीधा  करे  फिर  हाथो  को  निचे  लाई  | ईश अवस्था  में  विश्राम  करे  और  शरीर  में  हो  रही  संवेदनाऔ  के  प्रति  सजगता  ले  आए |

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